कुछ अनकही सी ज़िन्दगी

आँखों की चमक में छिपा एक सैलाब है, तुम्हारी तो हँसी में भी एक इंकलाब हैं, रात ग़मों की स्याही से और गहराई उसके मंसूबों को नाकाम करती तुम्हारी मुस्कान - एक पोशीदा नक़ाब है...

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