घर में बसते थे शिव, आज मन शिवालय हो गया

आँखें मूँद औंकार गूंजा अंतर्मन में, हे शिव तुमने लिया मुझे, आज अपने आलिंगन में। जूंझ रहा था जीवन जिससे, वह प्रलय अंत हो गया, घर में बसते थे शिव, आज मन शिवालय हो गया। साधू भी तुम, साधक भी तुम, हे भोलेनाथ, अठखेलियां करते बालक भी तुम, तुमको क्या मनाऊँ मैं, पिता सामान पालक... Continue Reading →

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लेखक हूँ, पर क्या लिखूँ ?

यूँ ही कुछ लिख लेता हूँ, लोग कहते हैं की कहानी अच्छी कह देता हूँ । मंज़र अलग से नज़र आते है मुझे , शब्दों का रुख मोड़ स्याह कलम से खेलता हूँ। पर डर लगता हैं आजकल कलम को मेरी, शब्दों के मेरे खेल से कहीं अनवर बुरा ना मान जाये? अभी कुछ दिन... Continue Reading →

Hope…New Year

Green shines the winter sun Floating in the luke warm breeze Melody chirps through the air Midnight today time will freeze A year of haves A year of have nots Slowly creeping by Giving way to light Strength to fight And a will to live Another day Another year ... Hope happy new year

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